हम सबने अभी कुछ ही दिनों पहले की dharmeshshah24 लिखी सुन्दर कहानी छोटी सी भूल पढ़ी है। यह कहानी ्नायक-नायिका के जीवन में कितने उतार चढ़ाव लाती है आपने यह सब भी पढ़ा है। रोमन में लिखी इस कहानी को पढ़ने के बाद मेरी इच्छा हुई कि क्यों ना इसे देवनागरी में लिखा जाये।?
तो मित्रों मैने इसे हिन्दी में लिखने की छोटी सी कोशिश की है, संभव है कि जल्दबाजी में कहीं ना कहीं कोई मात्रा की अशुद्धि रह गई हो। आप से अनुरोध है कि मुझे बतायें ताकि मैं बाद में उसे सुधार सकूं।
और हाँ व्यापार की व्यस्तता के चलते मैं इसे कब तक पूरी कर सकूंगा पता नहीं, मेरी पूरी कोशिश होगी कि जल्दी से जल्दी आपके लिए इसका पूरा हिन्दी करण कर सकूं।
तो मित्रों पेश है यह सुन्दर कहानी ....
मैने ऐसा सोचा भी नहीं था कि मेरी एक छोटी सी भूल मेरी जिन्दगी में एक तूफान लेकर आयेगी। पिछले साल की बात है. २० अप्रेल को करीब दो बजे मैं रसोई में खाना बना रही थी, गर्मी बहुत थी इसलिए मैं थोड़ी ठंडी हवा लेने के लिए खिड़की पर आ गई।
बाहर से ठंडी हवा का झोंका मुझे तरोताजा कर गया। तभी मुझे खयाल आया कि संजय (मेरे पति) आने वाले हैं और मैं वापस गैस की तरफ मुड़ गई।
संजय से मेरी शादी २००३ में हुई थी और उन्होने मुझे दुनिया का हर सुख दिया था। संजय एक डॉक्टर है और उनका अपना एक क्लिनिक है। हमारा ५ साल का बेटा भी है जिसको हम चिन्टू कह कर बुलाते हैं।
मैं फिर से ठंडी हवा लेने के लिए खिड़की की तरफ गई तो बाहर देख कर हैरान रह गई, हमारी खिड़की के बिल्कुल सामने एक १८ या १९ साल का लड़का पेशाब कर रहा था। इससे पहले की मैं मुड़ पाती, उस लड़के ने मुझे घूर कर देखा और मैं फौरन वहां से हट गई। मेरा दिल धक-धक करने लगा, मैं थोड़ा डर गई थी, पर क्यों कि मुझे लंच तैयार करना था इसलिए मैं सब कुछ भूल कर अपने काम में लग गई, क्यों कि संजय किसी भी वक्त खाना खाने आ सकते थे।
तभी डोरबेल बजी और मैने दरवाजा खोला तो पाया कि सामने संजय खड़े थे। उन्होने अन्दर आ कर झट से मुझे बाँहों में भर लिया और कहा कि आज शाम हम शादी में जा रहे हैं। फिर हम तीनों ने खाना खाया। मैं खिड़की वाली बात बिल्कुल भूल चुकी थी।
संजय वापस क्लिनिक चले गये और मैं चिन्टू को सुलाकर नहाने चली गई। शाम को हम शादी में गये और हमने खूब एन्जॉय किया। आते हुए संजय ने कहा "रितु तुम कल मेरे लिए लंच मत बनाना क्योंकि मैं कल एक ऑपरेशन करने वाला हूं", मैने कहा ठीक है।
अगले दिन मैं रोज की तरह लंच बना रही थी, मैं ठंडी हवा लेने के लिये खिड़की के पास गई और अपना पसीना पोंछने लगी, तभी ना जाने कहां से एक लड़का आ गया और अपने पेंट की जिप खोल कर पेशाब करने लगा, मैं वहाँ से फौरन हट गई, मैने कुछ नहीं देखा।
तभी मुझे खयाल आया कि अरे! यह तो वही कल वाला लड़का है, इसने क्या यहां अपना टॉयलेट बना लिया है। पर हमारे घर के पीछे थोड़ा सुनसान था और पिछली तरफ कोई घर नहीं था, तभी शायद लोग यहाँ टॉयलेट करने लगे हैं, पर मैने अब तक किसी और को नहीं देखा था।
हमारी रसोई, घर के पिछली तरफ होने की वजह से यह समस्या आन खड़ी हुई थी। खैर मैने सोचा कि आगे से मैं ध्यान रखूंगी और कम से कम खिड़की की तरफ जाऊंगी।
अगले दिन संजय को लंच पर आना था इसलिए मैं कुछ ज्यादा मेहनत कर रही थी, गर्मी से परेशान हो कर मैं खिड़की की तरफ गई तो चैन मिला कि बाहर कोई नहीं है और मैं ठंडी हवा का आनंद लेने लगी।
पर अचानक वही लड़का ना जाने कहाँ से आ गया और झट से अपनी जिप खोल कर अपना लिंग बाहर निकाल लिया। ये सब इतनी जल्दी हुआ कि ना चाहते हुए भी उसके लिंग पर मेरी नजर चली गई। मैं झट से वहाँ से हट गई और भाग कर अपने बेडरूम में आ गई।
मैने पहली बार संजय के अलावा किसी और का लिंग देखा था। उस लड़के के लिंग की साईज मेरी आँखों में घूम रहा था। मैं हैरान थी कि इस लड़के का लिंग मेरे पति के लिंग से बड़ा क्यों लग रहा था!
मैने पसीना पोंछ कर पानी पीया ही था कि अचानक प्रेशर कुकर की सीटी बज उठी और मैं होश में आई कि संजय आने वाले हैं। मैं रसोई में वापस आकर अपने काम में लग गई। संजय ३ बजे आये और ४ बजे खाना खाकर चले गये। मैं चिन्टू को सुला कर सोने के लिये बेडरूम में लेट गई।
पर मुझे नींद नहीं आई। मैं सोच रही थी कि आखिर ये लड़का कौन है और अक्सर यहीं आकर क्यों पेशाब करता है, ये कोई इत्तेफाक है या फिर वो ये जानबूझ कर, कर रहा है!
मैने फैसला किया कि मैं रात को संजय से बात करूंगी। पर रात को मैं इस बारे में बात ना कर सकी क्यों कि संजय सेक्स के मूड में थे और हम संभोग कर के सो गये।
खैर , अगले दिन मुझे चिन्टू के स्कूल जाना था इसलिए मैं संजय के जाने के बाद लगभग ११ बजे स्कूल के लिए निकली। स्कूल में चिन्टू की मैडम ने बताया कि चिन्टू गणित में थोड़ा कमजोर है इसलिए इस पर ध्यान दीजिये। स्कूल के बाद मैं मार्केट गयी और कुछ खरीददारी की। कब २ बज गये पता ही नहीं चला।
वापस आते हुए मैने रिक्शा ले लिया और घर की तरफ़ चल दी। रिक्शा वाले ने शोर्टकट के लिये हमारे घर के पीछे वाली गली में रिक्शा मोड़ लिया। मैने जो देखा वो देख कर मैं सहम गयी।
अगले दिन संजय को लंच पर आना था इसलिए मैं कुछ ज्यादा मेहनत कर रही थी, गर्मी से परेशान हो कर मैं खिड़की की तरफ गई तो चैन मिला की बाहर कोई नहीं है और मैं ठंडी हवा का आनंद लेने लगी।
पर अचानक वही लड़का ना जाने कहाँ से आ गया और झट से अपनी जिप खोल कर अपना लिंग बाहर निकाल लिया। ये सब इतनी जल्दी हुआ कि ना चाहते हुए भी उसके लिंग पर मेरी नजर चली गई। मैं झट से वहाँ से हट गई और भाग कर अपने बेडरूम में आ गई।
मैने पहली बार संजय के अलावा किसी और का लिंग देखा था। उस लड़के के लिंग का साईज मेरी आँखों में घूम रहा था। मैं हैरान थी कि इस लड़के का लिंग मेरे पति के लिंग से बड़ा क्यों लग रहा था!
मैने पसीना पोंछ कर पानी पीया ही था कि अचानक प्रेशर कुखर की सीटी बज उठी और मैं होश में आई कि संजय आने वाले हैं। मैं रसोई में वापस आकर अपने काम में लग गई। संजय ३ बजे आये और ४ बजे खाना खाकर चले गये। मैं चिन्टू को सुला कर सोने के लिये बेडरूम में लेट गई।
पर मुझे नींद नहीं आई। मैं सोच रही थी कि आखिर ये लड़का कौन है और अक्सर यहीं आकर क्यों पेशाब करता है, ये कोई इत्तेफाक है या फिर वो ये जानबूझ कर, कर रहा है!
मैने फैसला किया कि मैं रात को संजय से बात करूंगी। पर रात को मैं इस बारे में बात ना कर सकी क्यों कि संजय सेक्स के मूड में थे और हम संभोग कर के सो गये।
खैर , अगले दिन मुझे चिन्टू के स्कूल जाना था इसलिए मैं संजय के जाने के बाद लगभग ११ बजे स्कूल के लिए निकली। स्कूल में चिन्टू की मैडम ने बताया कि चिन्टू गणित में थोड़ा कमजोर है इसलिए इस पर ध्यान दीजिये। स्कूल के बाद मैं मार्केट गयी और कुछ खरीददारी की। २ बज गये पता ही नहीं चला।
वापस आते हुए मैने रिक्शा ले लिया और घर की तरफ़ चल दी। रिक्शा वाले ने शोर्टकट के लिये हमारे घर के पीछे वाली गली में रिक्शा मोड़ लिया। मैने जो देखा वो देख कर मैं सहम गयी।
वही लड़का आज फिर हमारे घर के पीछे खड़ा था, और हमारी रसोई की खिड़की की तरफ देख रहा था। वह एक साईकिल लिए था। मुझे रिक्शे पर देखते ही वो साइकिल खड़ी कर सीधा खड़ा हुआ और एक हाथ से अपने पेन्ट के ऊपर से अपना लिंग सहलाने लगा। उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कुराहट थी, जिसे देख कर मेरा रोम रोम काँप गया। वह मेरी तरफ एक तक देख रहा था। मैने अपनी नजरें झुका ली और धीरे- धीरे रिक्शा वहाँ से आगे निकल गया। मैने घर पहुंच कर रिक्शा वाले को झट से पैसे दिये और सीधी घर के अन्दर चली गई।
मैं समझ चुकी थी कि ये लड़का यह सब झानबूझ कर कर रहा है। मैने घर में घुसते ही १०० नंबर पर फोन लगाया पर लाईन व्यस्त होने के कारण फोन नहीं मिला। मैने पानी पिया और सोचा कि आखिर ये लड़का चाहता क्या है? मैने सोचा कि खिड़की से मेरा ये क्या बिगाड़ लेगा और मैं रसोई की खिड़की में आ गई।
वह खिड़की के सामने ही खड़ा था। दूर-दूर तक कोई नहीं था। इस से पहले कि मैं कुछ बोल पाती उसने अपनी जिप खोली और अपने काले मोटे लिंग को हवा में झुला दिया। मैं उसकी हिम्मत पर दंग रह गई।
मैने जोर से आवाज लगा कर कहा, हे! यहाँ से दफा हो जाओ, मैने पुलिस को फोन कर दिया है, अगर तुम नहीं गये तो तुम्हारी खैर नहीं।
उसने झट से अपनी जिप बंद की और वहाँ से चला गया।
मैने चैन की साँस ली। मैं खुश थी कि ये बला टल गई। पर मैं रोज २ बजे के आस पास खिड़की से झाँक कर देखती कि कहीं वह फिर से तो नहीं आ गया।
पर ना जाने क्यों उसके लिंग की छवि मेरी आँखों में घूमती रही। एक मन कहता कि चलो अच्छा हुआ कि ये किस्सा यहीं खत्म हो गया और एक मन कहता कि काश वो फिर यहाँ आकर पेशाब करे और मैं फिर से उसके लिंग को देखूं। मैने सोचा वो लड़का हे ही तो १८ या १९ साल जा, मैं २७ साल की हूँ, वो मेरा क्या बिगाड़ लेगा? अगर वो दुबारा यहाँ आता भी है तो मेरा क्या जायेगा!
मैं रोज खिड़की से देखती, पर कई दिनों तह वहाँ कोई नहीं दिखा।
एक दिन रोज की तरह मैने बाहर देखा तो वही लड़का खड़ा था। पहले मैं घबरा गई, पर फिर उसे दुबारा देख कर, खुशी भी हुई।
वो चुपचाप खड़ा हुआ था खामोशी से मुझे घूरता रहा, मैं भी उसे देखती रही। ना जाने मुझे क्या हो गया था। करीब २ मिनिट तक हम अपनी- अपनी जगह खड़े हुए एक दूसरे को देखते रहे। यही मेरी छोटी सी भूल थी, क्यों कि मैं जाने- अन्जाने में उसे एक मौका दे रही थी। मुझे उस वक्त नहीं पता था कि मैं किस आग से खेल रही हूँ।
फिर वो अचानक खिड़की के और पास आ गया और बोला कि पुलिस को तो नहीं बुलाओगी?
मेरी गर्दन झट से ना के इशारे में हिल गई।
फिर वो बोला, लंड देखोगी? अगर हाँ करोगी तो ही लंड बाहर निकालूंगा।
मैं अजीब सी कशमकश में पड़ गई, और कुछ भी बोल पाने की हालत में नहीं थी। उसने मेरी आँखों में देखा और कहा, अरे! शरमाती है तू तो, अपने पति का लंड नहीं देखती क्या?
ये कह कर वो धीरे से अपनी जिप खोलने लगा।
मैं शर्म से लाल हो गई, और मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैं वहाँ से हट जाना चाहती थी, पर पता नहीं मुझे क्या हुआ था कि मैं वहीं खिड़की में खड़ी रही।
फिर मैने हिम्मत कर कहा, मेरे पति आने वाले हैं, तुम यहाँ से चले जाओ।
वो बोला, "अरे चुप कर, मुझे सब पता है ३ बजे से पहले नहीं आयेगा वो। चल अब बोल, मेरी चैन खुली है, लंड बाहर निकालूं क्या?
मैं शरम से मरी जा रही थी, मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि ये सब मेरे साथ हो रहा है। उसने अपए हाथ अपनी पेन्ट में डाले और अपने लिंग को बाहर निकाल लिया।
मैं ना चाहते हुए भी हैरानी से एक टकटकी लगाकर उसके लम्बे काले लिंग को देखने लगी, मैने पहली बार इतने गौर से उसे देखा था, अब तक तो सिर्फ झलक ही देखी थी।
वो अपने लिंग को हाथ में पकड़ कर हिला रहा था। उसने "पूछा कैसा लगा मेरा लोड़ा?"
मैं कुछ नहीं बोली, और शर्म से अपनी नजरें झुका ली।
वो बोला, " तुझे पता है तेरी फिगर कितनी मस्त है, मैं अक्सर तुझे शाम को मार्केट में तेरे पति के साथ देखा है।
मैं हैरानी से सब सुन रही थी।
उसने आगे कहा, तू जब चलती है तो तेरी गांड क्या छलकती है, सच तुझे मटक-मटक कर चलते देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता है और मन करता है कि तेरी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर, लंड घुसा दूं और तेरी खूब गांड मारूं?
मैं शरम से पानी पानी हो गयी, पहली बार किसी ने मेरे बारे में ऐसी गंदी बात कही थी। मैं आखिर क्यों ये बकवास सुन रही थी पता नहीं, पर मेरे शरीर में एक अजीब सी हलचल हो रही थी ये सब सुन और देखकर।
वो आगे बोला तेरी चूचियाँ तो इस शहर में सबसे बड़ी है, शायद ही किसी की इतनी रसीली चूचियाँ होंगी, प्लीज एक बार दिखा ना।
मैने उसे गर्दन हिला कर साफ मना कर दिया, कि मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी।
थोड़ा मायूस सा होकर वो बोला, एक बात बता, तेरे पति का भी इतना बड़ा है क्या?
और मेरी गर्दन अपने आप ना के इशारे में हिल गई। तभी मुझे कुछ जलने की बदबू आई, मुझे खयाल आया कि ओह! मेरी सब्जी जल गई!!!
और मैं जल्दी से गैस की तरफ भागी, पर नुकसान हो चुका था। मैं गैस बंद कर के वापस खिड़की पर आ गई।
वो बोला क्या हुआ?
मुझे जाने क्या सूझा मैने कहा, तुम यहाँ से चले जाओ और दुबारा यहाँ मत आना। यह कर मुझे अजीब सा सूकून मिला। मुझे अहसास हो रहा थ कि जो कुछ भी हो रहा है, गलत है।
मैं फिर अपने काम में लग गयी, क्यों कि ३ बजने वाले थे, और संजय किसी भी वक्*त आ सकते थे, मैने अपना पूरा ध्यान खाना बनाने में लगा दिया। मैने कोई १० मिनिट बाद खिड़की से बाहर देखा तो वहाँ कोई नहीं था। मैने मन ही मन चैन की साँस ली। पर उस लड़के का कहा एक एक बोल मेरे कानों में गूंज रहा था। मैने सोचा कि क्या मैं सच में इतनी सेक्सी हूं कि लड़का मुझ पर फिदा हो गया है?
उस दिन संजय के जाने के बाद, मैने खुद को शीशे में गौर से देखा। मैने अपनी फिगर पर नजर दौड़ायी। मैने घूम कर अपने नितम्बों को भी देखा और पाया कि मैं वाकई में सुन्दर हूँ। पहली बार मैने खुद को ऐसे नजरिये से देखा था। पर अचानक मेरा अपने परिवार पर ध्यान गया और मुझे होश आया, कि मैं ये क्या कर रही हूँ और मैने अपने कपड़े पहने और सो गई।
अगले दिन मैने फैसला किया कि मैं खिडकी से बाहर नहीं झाकूंगी। पर मन में बार-बार उस लड़के का खयाल आ रहे थे। उसका कहा एक एक बोल मेरे मन में मानों बस गया था।
उसका लिंग मानों एक मूवी की तरह मेरे दिमाग में घूम रहा था। मैं कब २ बजने का इंतजार करने लगी पता ही नहीं चला।
मैने ठीक २ बजे बाहर देखा पर बाहर कोई नहीं था। मैं बार-बार आ कर देखती रही पर कोई नहीं दिखा। ३ बज गये और मेरे पति घर आ गये। मैं खाना परोसने लगी। संजय ने खाना खाया और करीब ३:३० बजे वापस चले गये।
मैं बर्तन रखने रसोई में आई तो देखा कि वह बाहर खड़ा था। मैं झट से खिड़की पर आ गई। वो भी जल्दी से खिड़की के पास आ गया।
उसने कहा, आज मेरी साईकिल पंक्चर हो गई थी, इसलिए २ बजे नहीं आ पाया। मैने कुछ नहीं कहा पर मेरे शरीर में उसे देखकर अजीब सी हलचल हो रही थी।
वो बोला, पता है कल मैने एक लड़की की चूत मारी, बहुत मजा आया, पर उसकी मारते हुए मुझे तेरा ही खयाल आ रहा था, माँ कसम, क्या बॉडी है तेरी, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं तेरी ही चूत मार रहा हूँ।
मैने शरम से अपनी नजरें झुका ली। मैने सोचा आखिर ये लड़का ऐसी गंदी बातें क्यों करता है पर ये सच था कि ये सब सुन सुन कर मेरी योनी गीली हो गई थी। पहली बार मैने ऐसी बातें सुनी थी।
उसने पूछा, तेरा नाम क्या है?
ना जाने क्यों मैने कहा, रितु! रितु गुप्*ता।
मैने पूछा, तुम्हारा नाम क्या है?
उसने जवाब दिया, "बिल्लू" और गिड़गिड़ाते हुए बोला, प्लीज एक बार अपनी चूची दिखा दो ना, मैं भी तो तुम्हे अपना लंड दिखाता हूँ
पर मुझ में इतनी हिम्मत नहीं थी कि संजय के अलावा, किसी और को अपने प्राईवेट पार्ट्स दिखा सकूं और मैं खामोश खड़ी रही।
वो समझ गया कि मैं उसे अपने उभार नहीं दिखाऊंगी.
वो बोला ठीक है, मैं लेट हो रहा हूं, मुझे काम पर जाना है।
मैने पुछा काम पर, क्या तुम पढ़ते नहीं हो ?.
उसने कहा, नहीं मैं इलेक्ट्रिक की दुकान पर इलेक्ट्रीशियन हूं, कभी तुम्हारे यहाँ बिजली की समस्या हो तो बताना।
ये कह कर वो चला गया और मैं भी अपने बेडरूम में आकर लेट गई।
--------XXX---------
शाम को संजय के आने के बाद मैं ब्यूटी पार्लर चली गई। वहाँ थोड़ा टाइम लग गया और ८ बज गये। मैं बाहर आकर रिक्शे का इंतजार करने लगी। अचानक एक रिक्शा मेरे सामने आकर रुका। पर मैं रिक्शा वाले को देखकर सहम गई।
वो बिल्लू था। मैने पूछा, तुमने झूठ कहा था कि तुम इलेक्ट्रिशियन हो।
वो बोला, नहीं वो सच था, मेरा वो काम थोड़ा मंदा है इसलिए कभी-कभी ये किराये का रिक्शा भी चला लेता हूँ।
मैने कुछ नहीं कहा और हैरानी से वहाँ खड़ी रही।
वो बोला, चलो बैठ जाओ मैं तुम्हें घर पर उतार दूंगा।
मैं उसे अचानक देख कर सहम गयी थी इसलिये समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं।
फिर मैने सोचा घर तो जाना ही है, मैं लेट भी हो रही थी, और मैं डरते डरते उसके रिक्शे मैं बैठ ही गई।
वो समझ गया कि मैं उसे अपने उभार नहीं दिखाऊंगी.
वो बोला ठीक है, मैं लेट हो रहा हूं, मुझे काम पर जाना है।
मैने पुछा काम पर, क्या तुम पढ़ते नहीं हो ?.
उसने कहा, नहीं मैं इलेक्ट्रिक की दुकान पर इलेक्ट्रीशियन हूं, कभी तुम्हारे यहाँ बिजली की समस्या हो तो बताना।
ये कह कर वो चला गया और मैं भी अपने बेडरूम में आकर लेट गई।
--------XXX---------
शाम को संजय के आने के बाद मैं ब्यूटी पार्लर चली गई। वहाँ थोड़ा टाइम लग गया और ८ बज गये। मैं बाहर आकर रिक्शे का इंतजार करने लगी। अचानक एक रिक्शा मेरे सामने आकर रुका। पर मैं रिक्शा वाले को देखकर सहम गई।
वो बिल्लू था। मैने पूछा, तुमने झूठ कहा था कि तुम इलेक्ट्रिशियन हो।
वो बोला, नहीं वो सच था, मेरा वो काम थोड़ा मंदा है इसलिए कभी-कभी ये किराये का रिक्शा भी चला लेता हूँ।
मैने कुछ नहीं कहा और हैरानी से वहाँ खड़ी रही।
वो बोला, चलो बैठ जाओ मैं तुम्हें घर पर उतार दूंगा।
मैं उसे अचानक देख कर सहम गयी थी इसलिये समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूं।
फिर मैने सोचा घर तो जाना ही है, मैं लेट भी हो रही थी, और मैं डरते डरते उसके रिक्शे मैं बैठ ही गई।
क्रमश:
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